बारिश में पौधों की पीली पत्तियाँ

बारिश में पौधों की पत्तियाँ पीली क्यों हो जाती हैं? जानिए 7 कारण और आसान उपाय

बारिश में पौधों की पत्तियाँ पीली होना आम बात है। जरूरी नहीं कि हर बार इसके पीछे कोई समस्या ही हो। पौधे की पुरानी और परिपक्व पत्तियों का धीरे-धीरे पीला होना और फिर गिर जाना बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है

लेकिन जब समय से पहले या एक साथ बहुत सारी पत्तियाँ पीली पड़ने लगें, पौधे में नई पत्तियों का निकलना रुक जाए या नई पत्तियाँ भी पीली पड़ने लगें, तो निश्चित रूप से यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है। पत्तियों के गिरने से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है, जिससे हमारे पौधे की वृद्धि रुक सकती है।

अक्सर ऐसा हमारी ही कुछ गलतियों की वजह से होता है, जिन्हें सुधारकर हम अपने पौधों को स्वस्थ रख सकते हैं। आज इस लेख में हम बारिश में पौधों की पत्तियों के पीले होने के 7 मूल कारण और उनके आसान उपायों के बारे में जानेंगे।

 

1. गमले में जलभराव की समस्या

बारिश के मौसम में गमले में पानी का जमा होना पत्तियों के पीले होने का एक प्रमुख कारण है। लगातार बारिश, खराब जल निकासी और भारी मिट्टी (potting mix) की वजह से हमारे गमलों में पानी जमा हो जाता है।

गमले या पौधे की जड़ों के आसपास लगातार पानी जमा होने से पौधे की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। इससे जड़ों के सड़ने का भी खतरा होता है, जिससे पौधे की पत्तियाँ पीली पड़ने से लेकर खराब स्थिति में पौधा मर भी सकता है।

जलभराव की समस्या को ठीक करने के लिए सबसे जरूरी है कि गमले के drainage hole सही हों। गमले में मिट्टी भरते समय यह सुनिश्चित करें कि drainage hole को किसी पत्थर या टूटे हुए गमले के टुकड़े से इस तरह ढक दें कि पानी आसानी से बाहर निकलता रहे, लेकिन मिट्टी drainage hole को बंद न करे। इसके बाद ही मिट्टी (potting mix) भरें।

अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी (potting mix) का प्रयोग करें, जिससे अतिरिक्त पानी drainage hole से आसानी से बाहर निकल जाए। सामान्य रूप से 50% गार्डन की मिट्टी + 30% रेत + 20% गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का मिश्रण अच्छा रह सकता है। लेकिन अगर आपकी गार्डन की मिट्टी ज्यादा भारी है, तो रेत की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है।

कम पानी की जरूरत वाले पौधों को ऐसी जगह रखना चाहिए, जहाँ उन्हें पर्याप्त रोशनी और हवा मिलती रहे, लेकिन बारिश का पानी सीधे उन पर न पड़े।

अगर आप बारिश के मौसम में पौधों को होने वाली दूसरी समस्याओं और उन्हें बचाने के आसान उपायों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह लेख भी पढ़ें — बारिश में पौधों को मरने से कैसे बचाएँ? 7 आसान उपाय।

 

2. बारिश में फंगल रोगों का प्रकोप

बारिश के मौसम में हवा में नमी की मात्रा बढ़ जाने की वजह से पौधों में fungal disease का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण बारिश में पौधों की पत्तियाँ पीली होना, पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे पड़ना, जड़ों का सड़ना और पौधे की growth का रुक जाना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो fungal infection धीरे-धीरे पौधे के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है।

 

बारिश में पौधों की पत्तियों पर फंगल रोग

 

जब लगातार गमले की मिट्टी गीली रहती है और पौधों को पर्याप्त हवा और sunlight नहीं मिल पाती है, तो ऐसे वातावरण में fungus का पनपना आसान हो जाता है। खासकर घने पौधों या ऐसे पौधों में, जिनकी पत्तियाँ और शाखाएँ एक-दूसरे से लगातार छूती रहती हैं, नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है।

दोस्तों, पौधों को किसी भी तरह के fungal disease से बचाए रखने के लिए सबसे पहले गमले में पानी रुकने न दें। मिट्टी (Potting Mix) की ऊपरी परत सूखे बिना watering बिल्कुल न करें। पौधे को ऐसी जगह रखें, जहाँ उसे पर्याप्त sunlight और हवा मिल सके। साथ ही, कोशिश करें कि पौधों की पत्तियों पर लंबे समय तक पानी जमा न रहे।

बरसात के मौसम में सभी पौधों को बहुत पास-पास न रखें। उनके बीच पर्याप्त दूरी रखें, जिससे उन्हें उचित मात्रा में हवा और धूप मिल सके। अगर पौधे का कोई हिस्सा fungal disease से प्रभावित हो गया है, तो उसे साफ और disinfected pruning tool से cut करके पौधे से हटा दें। संक्रमित पत्तियों या शाखाओं को दूसरे स्वस्थ पौधों के पास न रखें, क्योंकि इससे infection फैलने का खतरा हो सकता है।

अगर समस्या ज्यादा बढ़ गई हो, तो जरूरत पड़ने पर अच्छी quality का fungicide इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी भी fungicide का उपयोग करते समय उसके पैकेट पर दिए गए निर्देशों और मात्रा का ही पालन करें। बिना जरूरत बार-बार fungicide का इस्तेमाल करने के बजाय पहले पौधे की स्थिति और fungal problem का कारण समझना ज्यादा जरूरी है।

 

3. मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी

मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का बारिश के पानी के साथ बह जाना भी पौधों की पत्तियों के पीले हो जाने का एक कारण हो सकता है।

बरसात के मौसम में जब लगातार बारिश होती है, तो मिट्टी में मौजूद कुछ पानी में घुलनशील पोषक तत्व पानी के बहाव के साथ बाहर निकल सकते हैं। इससे मिट्टी (potting mix) में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है और हमारे पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लग सकती हैं। लगातार बारिश के दौरान जब गमले से पानी बार-बार बाहर निकलता है, तो इस प्रक्रिया से पोषक तत्वों की कमी धीरे-धीरे बढ़ सकती है।

 

बारिश में मिट्टी और पौधों में पोषक तत्वों की कमी

 

पोषक तत्वों की कमी होने पर केवल पत्तियों का पीला होना ही नहीं, बल्कि पौधे की growth धीमी होना, नई पत्तियों का छोटा रह जाना और पौधे का कमजोर दिखाई देना जैसी समस्याएँ भी देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, हर बार पत्तियों के पीले होने का कारण पोषक तत्वों की कमी ही हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए fertilizer देने से पहले पौधे की पूरी स्थिति को देखना जरूरी है।

इस समस्या से बचने के लिए बरसात के मौसम में जल्दी पानी में घुल जाने वाले fertilizer की जगह धीरे-धीरे पोषक तत्व छोड़ने वाले (slow release fertilizer) का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद, leaf mold और नीम खली जैसे जैविक खादों से पोषक तत्व धीरे-धीरे उपलब्ध होते हैं, जिससे पौधा उन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल कर पाता है और अपनी healthy growth बनाए रखता है।

अगर लगातार बारिश के बाद पौधे की पत्तियाँ पीली पड़ने लगी हैं, तो तुरंत अधिक मात्रा में fertilizer डालने के बजाय पहले यह देखना चाहिए कि कहीं गमले में जलभराव, fungal disease या जड़ों से जुड़ी कोई दूसरी समस्या तो नहीं है। कारण समझने के बाद ही उचित मात्रा में खाद (fertilizer) देना पौधे के लिए बेहतर रहता है।

 

4. बरसात के मौसम में पर्याप्त धूप न मिलना

दोस्तों, कई बार लगातार बारिश और बादल छाए रहने की वजह से लंबे समय तक हमारे पौधों को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में पौधे में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप बारिश में पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं। अगर लंबे समय तक पौधे को पर्याप्त रोशनी न मिले, तो उसकी growth भी धीमी हो सकती है और नई पत्तियों का विकास प्रभावित हो सकता है।

कई बार हम बारिश के पानी से पौधों को बचाने के लिए उन्हें पूरी तरह छायादार जगह पर रख देते हैं या कई पौधों को बहुत पास-पास रख देते हैं। ऐसा करने से पौधों तक हवा और रोशनी दोनों की मात्रा कम हो सकती है। खासकर ऐसे पौधे जिन्हें अच्छी रोशनी की जरूरत होती है, उनमें लंबे समय तक कम रोशनी रहने पर पत्तियाँ पीली होकर गिरने लग सकती हैं।

दोस्तों, लगातार बारिश या बादल छाए रहने की स्थिति में बहुत कुछ हमारे हाथ में नहीं होता। फिर भी कोशिश करें कि पौधों को ऐसी जगह रखें, जहाँ बारिश के बीच जब भी थोड़ी धूप निकले, वह पौधों तक पहुँच सके। अगर लगातार बादल छाए हुए हैं, तो भी पौधों को पूरी तरह अंधेरी जगह पर रखने के बजाय ऐसी जगह रखें, जहाँ उन्हें पर्याप्त चमकदार प्राकृतिक रोशनी मिलती रहे।

अगर पौधों को बारिश से बचाना जरूरी हो, तो उन्हें ऐसी जगह रखें जहाँ ऊपर से सीधे बारिश का पानी न पड़े, लेकिन आसपास से प्राकृतिक रोशनी और हवा मिलती रहे। साथ ही, पौधों को एक-दूसरे से बहुत पास-पास रखने के बजाय उनके बीच थोड़ी दूरी रखें। इससे उपलब्ध रोशनी का बेहतर उपयोग होगा और पौधों के आसपास हवा का संचार भी बना रहेगा।

हालाँकि, बरसात के मौसम में हर पीली पत्ती का कारण कम धूप ही हो, यह जरूरी नहीं है। अगर पौधे की पत्तियाँ पीली होने के साथ मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है, जड़ों से दुर्गंध आती है या पत्तियों पर धब्बे दिखाई दे रहे हैं, तो जलभराव या fungal disease जैसी दूसरी समस्याओं की भी जाँच करनी चाहिए।

 

5. बारिश के मौसम में कीटों का हमला

बारिश के मौसम में हरियाली के साथ-साथ कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। कई तरह के कीट पौधों की पत्तियों और नई कलियों को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ उनका रस भी चूसते हैं। इसके कारण पौधों की पत्तियाँ पीली या काली पड़ सकती हैं और धीरे-धीरे सूखकर गिरने लगती हैं। कुछ कीट नई पत्तियों और कोमल शाखाओं को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे पौधे की growth प्रभावित होती है।

 

बारिश में पौधों की पत्तियाँ पीली

 

बारिश आते ही हमारे गमलों या बगीचे में बहुत सारी घास-फूस भी उगना शुरू हो जाती है। इनके साथ कई तरह के छोटे कीटों की संख्या भी बढ़ सकती है। इसके अलावा, अनावश्यक घास-फूस हमारे गमलों की मिट्टी (potting mix) में मौजूद पोषक तत्वों और पानी का भी इस्तेमाल करती है, जिनकी जरूरत हमारे पौधों को होती है।

इसलिए बरसात के मौसम में समय-समय पर अपने गमलों और garden में उग रही अनावश्यक घास-फूस को जड़ सहित उखाड़कर हटा देना चाहिए। अपने गमलों में घास-फूस को ज्यादा बढ़ने न दें और आसपास की जगह को भी साफ रखें। इससे पौधों के लिए उपलब्ध पोषक तत्वों की अनावश्यक खपत कम होगी और कीटों के छिपने या बढ़ने की संभावना भी कम की जा सकती है।

साथ ही, समय-समय पर अपने पौधों की पत्तियों की जांच करते रहें, खासकर पत्तियों की निचली सतह को। कई बार सामने से देखने पर पत्ती बिल्कुल स्वस्थ दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे छोटे-छोटे कीट या उनके अंडे मौजूद हो सकते हैं। नई पत्तियों, कलियों और कोमल शाखाओं को भी ध्यान से देखते रहें, क्योंकि कीट अक्सर इन्हीं हिस्सों को ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।

अगर पौधे पर कीटों का प्रकोप कम है, तो शुरुआत में प्रभावित पत्तियों या कीटों को हाथ से हटाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर नीम तेल का छिड़काव भी किया जा सकता है। नीम तेल को पानी में अच्छी तरह मिलाने के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में mild liquid soap या उपयुक्त emulsifier का इस्तेमाल करें और छिड़काव करते समय पत्तियों की ऊपरी और निचली दोनों सतहों पर ध्यान दें। किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का इस्तेमाल करते समय उसके पैकेट पर दिए गए निर्देशों और सही मात्रा का पालन करें।

 

6. पौधे का तनाव में आ जाना

बारिश के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और मौसम में होने वाले अचानक बदलाव की वजह से भी पौधे stress में जा सकते हैं। इसके अलावा, पौधे की जगह बार-बार बदलना, अचानक तेज धूप में रख देना, बहुत ज्यादा पानी देना या किसी दूसरे वातावरण से पौधे को अचानक नए वातावरण में लाना भी पौधे के लिए तनाव का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में पौधे की पत्तियाँ पीली पड़ने, मुरझाने या समय से पहले गिरने जैसी समस्याएँ दिखाई दे सकती हैं।

 

पौधे का तनाव में आ जाना

 

कई बार अनजाने में हम ऐसी छोटी-छोटी गलतियाँ कर देते हैं, जिनसे हमारा पौधा stress में चला जाता है। इसलिए जब किसी स्वस्थ दिखाई देने वाले पौधे की पत्तियाँ अचानक तेजी से पीली पड़ने लगें, तो केवल fertilizer देने के बजाय पहले यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि पौधे की देखभाल में हाल ही में कोई बदलाव तो नहीं किया गया है।

पौधे को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह न रखें। कोशिश करें कि उसे ऐसी जगह रखा जाए, जहाँ उसे उसकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त रोशनी और हवा मिलती रहे। अगर पौधा ऐसी जगह रखा है जहाँ उसे पहले से पर्याप्त रोशनी मिल रही है, तो बिना किसी जरूरत के उसकी location बदलने से बचें। खासकर बरसात के बाद अचानक तेज धूप निकलने पर बहुत कम रोशनी वाली जगह से पौधे को सीधे तेज धूप में रखने के बजाय धीरे-धीरे धूप की आदत डालना बेहतर रहता है।

जब भी कोई नया पौधा nursery से घर लाएँ, तो उसे तुरंत तेज धूप में रखने के बजाय कुछ समय उसके नए वातावरण में adjust होने दें। अगर पौधे को repot करने की जरूरत हो, तो उचित आकार के गमले और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी (potting mix) का इस्तेमाल करें। Repot करने के बाद पौधे को कुछ समय bright light में रखें और उसकी स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे उसे पहले वाली रोशनी की आदत डालें। इससे transplanting के कारण होने वाला stress कम करने में मदद मिल सकती है।

अगर पौधा अचानक मुरझाया हुआ दिखाई दे, उसकी पत्तियाँ तेजी से पीली पड़ने लगें या उसकी growth रुक जाए, तो केवल इसे stress मान लेना सही नहीं होगा। ऐसे समय में drainage hole, मिट्टी में जलभराव और जड़ों की स्थिति की भी जाँच करनी चाहिए। अगर जड़ें काली, मुलायम या सड़ी हुई दिखाई दें, तो root rot की समस्या हो सकती है। इसी तरह पत्तियों पर असामान्य धब्बे दिखाई दें तो fungal disease की भी जाँच करनी चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि पौधे को stress से बाहर आने के लिए थोड़ा समय दें। एक साथ कई बदलाव करने, बार-बार जगह बदलने या जरूरत से ज्यादा पानी और fertilizer देने के बजाय पहले समस्या का कारण समझें और फिर धीरे-धीरे जरूरी सुधार करें। सही वातावरण और उचित देखभाल मिलने पर बहुत से पौधे कुछ समय में दोबारा स्वस्थ growth शुरू कर देते हैं।

 

7. उर्वरक या कीटनाशक का गलत इस्तेमाल

दोस्तों, fertilizer या pesticides का अनावश्यक या गलत तरीके से इस्तेमाल करने से भी हमारे पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लग सकती हैं। खासकर बरसात के मौसम में जब पौधे की condition थोड़ी खराब दिखाई देती है, तो हम कई बार बिना समस्या का सही कारण जाने fertilizer या pesticide का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। लेकिन हर बार पीली पत्तियों या कमजोर growth का कारण पोषक तत्वों की कमी या कीटों का हमला ही हो, यह जरूरी नहीं है।

जब भी पौधे की पत्तियाँ पीली पड़ने लगें या पौधे की growth कमजोर दिखाई दे, तो सबसे पहले समस्या का कारण समझने की कोशिश करें। अगर पौधे में वास्तव में पोषक तत्वों की कमी नहीं है, तो जरूरत से ज्यादा fertilizer देने से पौधे को फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है। खासकर chemical fertilizer जल्दी असर करता है, इसलिए इसका इस्तेमाल करते समय मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अधिक मात्रा में fertilizer देने से मिट्टी में लवण की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे पौधे की जड़ों को नुकसान पहुँच सकता है और पत्तियाँ पीली या किनारों से सूखने लग सकती हैं।

इसी तरह, केवल एक-दो कीट दिखाई देने पर तुरंत pesticide का छिड़काव करने की जरूरत नहीं होती। अगर पौधे की किसी एक या दो शाखाओं या कुछ पत्तियों पर insects का प्रभाव दिखाई दे, तो शुरुआत में उन्हें हाथ से हटाया जा सकता है या प्रभावित हिस्से को साफ करके पौधे से अलग किया जा सकता है। इससे बिना जरूरत पूरे पौधे पर pesticide का इस्तेमाल करने से बचा जा सकता है।

अगर कीटों का प्रकोप ज्यादा हो जाए और pesticide का इस्तेमाल जरूरी लगे, तो हमेशा पौधे और कीट के अनुसार उपयुक्त pesticide का चुनाव करें और उसके पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही मात्रा और छिड़काव की विधि अपनाएँ। अधिक मात्रा में pesticide इस्तेमाल करने से समस्या जल्दी ठीक होने के बजाय पौधे की पत्तियों को नुकसान पहुँच सकता है।

बरसात के मौसम में किसी भी fertilizer या pesticide का इस्तेमाल करने से पहले मौसम और पौधे की स्थिति का भी ध्यान रखें। बारिश के तुरंत पहले pesticide का छिड़काव करने से वह पानी के साथ बह सकता है और उसका असर कम हो सकता है। इसी तरह, लगातार बारिश के दौरान बिना जरूरत fertilizer डालने से भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

इसलिए पौधे की पत्तियाँ पीली दिखाई देने पर सबसे पहले उसका कारण पहचानें और फिर उसी के अनुसार उपचार करें। जरूरत से ज्यादा fertilizer या pesticide देने के बजाय सही समय पर सही मात्रा में इस्तेमाल करना ही पौधे को स्वस्थ रखने का बेहतर तरीका है।

 

निष्कर्ष

बारिश में पौधों की पत्तियाँ पीली होना एक आम समस्या है, लेकिन हर बार इसका कारण एक जैसा नहीं होता। कभी गमले में जलभराव और fungal disease इसकी वजह बन सकते हैं, तो कभी लगातार बारिश के कारण मिट्टी से पोषक तत्वों का बह जाना, पर्याप्त धूप न मिलना, कीटों का प्रकोप या पौधे का stress में आ जाना भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। इसके अलावा, बिना जरूरत fertilizer या pesticide का इस्तेमाल करने से भी पौधे की स्थिति और खराब हो सकती है।

इसलिए जब भी बारिश के मौसम में आपके पौधे की पत्तियाँ पीली पड़ने लगें, तो घबराकर तुरंत fertilizer या pesticide डालने के बजाय सबसे पहले उसके सही कारण को समझने की कोशिश करें। गमले में जलभराव न होने दें, पौधे को उसकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त रोशनी और हवा दें, समय-समय पर कीटों और fungal disease की जाँच करते रहें और जरूरत के अनुसार ही खाद या किसी chemical का इस्तेमाल करें।

दोस्तों, पौधों की अच्छी देखभाल का मतलब केवल समस्या आने के बाद उसका इलाज करना नहीं है, बल्कि मौसम के अनुसार उनकी जरूरतों को समझना और समय रहते सही देखभाल करना भी है। अगर हम बारिश के मौसम में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो अपने पौधों को स्वस्थ और हरा-भरा बनाए रखना काफी आसान हो सकता है।

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