सर्दियों में लगाए जाने वाले फूल यूं तो बहुत है, लेकिन सही चुनाव से आपका गार्डन पूरे मौसम में रंगीन रहेगा। गुलाब, गुलदाउदी, पेटूनिया, डहलिया और अन्य फूलों की देखभाल की जानकारी आपको इस लेख में मिलेगी।दोस्तों, सर्दियों के मौसम का इंतजार हर गार्डन लवर को रहता है, क्योंकि यह फूलों का मौसम होता है। जहाँ गर्मी और बरसात में पौधों को बचाने और उनकी देखभाल करने की कोशिश चलती रहती है, वहीं सर्दियों में कम मेहनत और सही देखभाल के साथ पूरा गार्डन रंग-बिरंगे फूलों से भर सकता है।
गुलाब, गुलदाउदी, पेटूनिया, कैलेंडुला, पैंसी, डहलिया, गज़ानिया और कई दूसरे फूलदार पौधे सर्दियों में बहुत अच्छी फूलों की बहार देते हैं। अगर इन्हें सही धूप, सही मिट्टी, जरूरत के अनुसार पानी और थोड़ी-सी खाद मिल जाए, तो गमले, बालकनी, छत या गार्डन—हर जगह बहुत खूबसूरत दिखाई देने लगती है।
लेकिन किसी भी फूलदार पौधे को लगाने से पहले उसकी जरूरतों को समझना जरूरी है। उसे कितनी धूप चाहिए, पानी कब देना है, किस तरह की मिट्टी पसंद है और फूल ज्यादा पाने के लिए कौन-सी देखभाल करनी है—इन बातों का ध्यान रखने पर पौधे स्वस्थ रहते हैं और लंबे समय तक फूल देते हैं।
इस लेख में हम सर्दियों में लगाए जाने वाले 20 बेहतरीन फूलों के बारे में जानेंगे। इनमें से कुछ पौधे कम देखभाल में भी अच्छे फूल देते हैं, जबकि कुछ पौधों को थोड़ा अधिक ध्यान चाहिए। अगर आप इस सर्दी अपने गार्डन या बालकनी को रंग-बिरंगे फूलों से भरना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी रहेगा।
सर्दियों के फूलों की सामान्य देखभाल
ज्यादातर सर्दियों के फूलदार पौधों की कुछ जरूरतें लगभग एक जैसी होती हैं:
• गमले में पानी निकलने के लिए पर्याप्त छेद जरूर रखें।
• पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत को देखें। ऊपर की मिट्टी सूखने पर ही दोबारा पानी दें।
• ज्यादातर पौधों को रोजाना 4–8 घंटे तक धूप या अच्छी रोशनी चाहिए।
• अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट या पत्तियों की खाद थोड़ी मात्रा में दी जा सकती है।
• जरूरत से ज्यादा खाद देने से ज्यादा फूल नहीं मिलते, बल्कि जड़ों को नुकसान हो सकता है।
• मुरझाए हुए फूल, सूखी पत्तियां और खराब शाखाएं समय-समय पर हटाते रहें।
• गमले में लगातार पानी जमा रहने से जड़ें सड़ सकती हैं और फफूंद की समस्या भी हो सकती है।
• किसी खाद, कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल करते समय पैकेट पर दिए निर्देश जरूर पढ़ें।
1. गुलाब (Rose)

गुलाब दुनिया के सबसे पसंद किए जाने वाले फूलों में से एक है। इसकी खूबसूरती, रंग और खुशबू इसे गार्डन का खास पौधा बनाते हैं। शायद इसी वजह से गुलाब को “फूलों का राजा” भी कहा जाता है।
गुलाब को बीज से उगाना संभव है, लेकिन नए बागवानों के लिए यह तरीका थोड़ा मुश्किल और समय लेने वाला हो सकता है। देसी गुलाब को बरसात या बसंत के मौसम में कटिंग से उगाया जा सकता है। लेकिन अगर आप पहली बार गुलाब लगा रहे हैं, तो नर्सरी से स्वस्थ और तैयार पौधा लेना आसान रहेगा।
देसी गुलाब का पौधा कम कीमत में मिल सकता है, जबकि इंग्लिश रोज की कुछ किस्में महंगी होती हैं। गुलाब केवल एक मौसम का पौधा नहीं है। सर्दियों के बाद इसमें फूल कुछ कम हो सकते हैं, लेकिन सही देखभाल के साथ यह कई सालों तक जीवित रहता है।
हाइब्रिड टी, फ्लोरिबंडा, ग्रैंडिफ्लोरा, क्लाइम्बिंग रोज और मिनिएचर रोज इसकी कुछ प्रसिद्ध किस्में हैं।
गमले में गुलाब कैसे लगाएँ?
गुलाब के लिए 12–15 इंच का मिट्टी का गमला अच्छा रहता है। मिट्टी का गमला हवा के आने-जाने और अतिरिक्त नमी निकलने में मदद करता है। मिट्टी का गमला न हो तो सीमेंट या मजबूत प्लास्टिक का गमला भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
गुलाब को उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पसंद होती है। आप लगभग 50% बगीचे की मिट्टी, 30% मोटी रेत और 20% अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर मिट्टी का मिश्रण तैयार कर सकते हैं। इसमें थोड़ी मात्रा में नीम खली भी मिलाई जा सकती है।
गुलाब को कितनी धूप चाहिए?
गुलाब को रोजाना लगभग 6–8 घंटे की सीधी धूप मिलने पर अच्छी बढ़वार और फूल आते हैं। धूप कम मिलने पर इसकी शाखाएं कमजोर हो सकती हैं और फूल भी कम आ सकते हैं।
गुलाब में पानी और खाद
गुलाब में पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी 1–2 इंच परत जरूर जांचें। जब मिट्टी सूखी लगे, तभी पानी दें। मिट्टी में हल्की नमी रहनी चाहिए, लेकिन गमले में पानी लगातार जमा नहीं होना चाहिए।
अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद दी जा सकती है। फूलों की कलियां बनने के समय जरूरत के अनुसार कोई उपयुक्त फूलों वाली खाद दी जा सकती है। बोन मील, डीएपी या किसी रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते समय मात्रा पैकेट पर दिए निर्देशों के अनुसार ही रखें।
गुलाब में ज्यादा फूलों के लिए क्या करें?
खिलकर मुरझा चुके फूलों को समय-समय पर हटा दें। सूखी, खराब या रोगग्रस्त पत्तियों और शाखाओं को साफ प्रूनर से काटकर अलग करते रहें। पर्याप्त धूप, सही मात्रा में पानी और समय-समय पर उचित खाद मिलने पर गुलाब सर्दियों में बहुत अच्छे फूल दे सकता है।
2. गुलदाउदी (Chrysanthemum)

सर्दियों में लगाए जाने वाले फूल का जिक्र हो और गुलदाउदी का नाम न आए, ऐसा नामुमकिन है। गुलाब के बाद गुलदाउदी भी सर्दियों के गार्डन में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फूलों में से एक है। इसके फूल अलग-अलग आकार, रंग और रूप में मिलते हैं। पीले, सफेद, गुलाबी, बैंगनी, लाल और कई दूसरे रंगों की गुलदाउदी गार्डन की खूबसूरती बढ़ा देती है।
गुलदाउदी को बीज और तने की कटिंग, दोनों से उगाया जा सकता है। अगर आप नए बागवान हैं तो नर्सरी से तैयार पौधा लेना सबसे आसान रहेगा। सितंबर–अक्टूबर के आसपास इसकी छोटी पौध या तैयार पौधे नर्सरी में मिल जाते हैं।
अगर आपको किसी खास रंग या किस्म की गुलदाउदी चाहिए, तो ऐसा पौधा चुनें जिसकी पत्तियां हरी हों, शाखाएं अच्छी हों और जिस पर बहुत सारी कलियां लगी हों। केवल बहुत ज्यादा खिले हुए फूल देखकर पौधा न खरीदें।
गुलदाउदी की प्रसिद्ध किस्में
पॉमपॉम, स्पाइडर या फायरक्रैकर, मल्टीफ्लोरा या ड्वार्फ और स्नो बॉल जैसी किस्में काफी पसंद की जाती हैं। नर्सरी से पौधा खरीदते समय फूलों के रंग के साथ पौधे की सेहत और शाखाओं को भी देखें।
गमले में गुलदाउदी कैसे लगाएँ?
छोटी पौध के लिए शुरुआत में 4–6 इंच का गमला या ग्रो बैग इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधा बड़ा होने पर बौनी किस्मों के लिए 8–10 इंच और बड़े फूल वाली किस्मों के लिए 10–12 इंच का गमला अच्छा रहता है।
गुलदाउदी के लिए 50% बगीचे की मिट्टी, 30% मोटी रेत और 20% अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट या पत्तियों की खाद का मिश्रण इस्तेमाल कर सकते हैं।
गुलदाउदी को कितनी धूप चाहिए?
गुलदाउदी को रोजाना लगभग 6–8 घंटे की सीधी धूप मिलने पर मजबूत शाखाएं और अच्छे फूल आते हैं। धूप कम होने पर शाखाएं लंबी और कमजोर हो सकती हैं तथा पौधा घना नहीं बनता।
गुलदाउदी में पानी और खाद
मिट्टी में हल्की नमी रखें, लेकिन उसे लगातार गीला न रहने दें। ऊपर की मिट्टी सूखने पर पानी दें। बढ़वार के समय वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद या पत्तियों की खाद थोड़ी मात्रा में दी जा सकती है।
कलियां बनने के समय जरूरत के अनुसार फूलों वाली खाद दी जा सकती है। रासायनिक खाद हमेशा सही मात्रा में और पैकेट के निर्देशों के अनुसार ही दें।
ज्यादा फूलों के लिए पिंचिंग करें
गुलदाउदी के पौधे को घना और झाड़ीदार बनाने के लिए शुरुआत की बढ़वार के समय पिंचिंग की जा सकती है। इसमें पौधे की ऊपर की बढ़ती हुई नोक को साफ उंगलियों या प्रूनर से हल्का-सा हटा दिया जाता है। इससे नीचे की तरफ नई शाखाएं निकलती हैं और आगे ज्यादा फूलों की कलियां बन सकती हैं।
फूल आने के बहुत करीब पहुंचने के बाद पिंचिंग करते रहने से फूल आने में देरी हो सकती है, इसलिए इसे सही समय पर ही करें।
गुलदाउदी में कीड़े और बीमारी
गुलदाउदी में माहू, सफेद मक्खी, माइट्स और दूसरे रस चूसने वाले कीड़े दिखाई दे सकते हैं। ज्यादा नमी रहने पर फफूंद से जुड़ी बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए पौधे को समय-समय पर देखें और खराब पत्तियों को हटा दें।
नीम तेल या किसी कीटनाशक का इस्तेमाल करना हो तो पैकेट पर दिए अनुपात और सावधानियों का ध्यान रखें। तेज धूप में छिड़काव करने से बचें।
3. पेटूनिया (Petunia)

सर्दियों की बात हो और पेटूनिया का जिक्र न हो, ऐसा लगभग नामुमकिन है। इसके लाल, गुलाबी, बैंगनी, सफेद और कई रंगों वाले फूल गमले, बालकनी और हैंगिंग बास्केट को बहुत खूबसूरत बना देते हैं।
पेटूनिया का तैयार पौधा नर्सरी से आसानी से मिल जाता है। इसे बीज से भी उगाया जा सकता है, लेकिन अगर आप जल्दी फूल देखना चाहते हैं तो नर्सरी से स्वस्थ पौधा लेना आसान विकल्प है।
गमले में पेटूनिया कैसे लगाएँ?
पेटूनिया ऊंचाई की बजाय चौड़ाई में ज्यादा फैलता है। इसकी जड़ें बहुत गहराई तक नहीं जातीं, इसलिए बहुत गहरे गमले की जगह थोड़ा कम गहरा लेकिन चौड़ा गमला बेहतर रहता है।
इसकी जड़ें नाजुक होती हैं, इसलिए मिट्टी हल्की और अच्छी जल निकासी वाली रखें। गमले में पानी निकलने के लिए छेद जरूर हों।
पेटूनिया को कितनी धूप और पानी चाहिए?
पेटूनिया को अच्छी बढ़वार और ज्यादा फूलों के लिए पर्याप्त सीधी धूप चाहिए। मिट्टी लगातार गीली न रखें। ऊपर की मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।
गमले में पानी जमा रहने से इसकी नाजुक जड़ें सड़ सकती हैं, इसलिए पानी देने के साथ-साथ अच्छी जल निकासी भी जरूरी है।
पेटूनिया में ज्यादा फूलों के लिए देखभाल
पेटूनिया में थोड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद दी जा सकती है। किसी फूलों वाली खाद का इस्तेमाल करें तो उसकी मात्रा सही रखें।
खिलकर मुरझा चुके फूलों को समय-समय पर हटा दें। इससे पौधा बीज बनाने में कम ऊर्जा खर्च करता है और नई शाखाएं तथा नई कलियां बनाने में ज्यादा ऊर्जा लगा सकता है।
मेरे अनुभव में पेटूनिया कम देखभाल में भी अच्छा परिणाम देने वाला सर्दियों का फूल है। इसे अच्छी धूप, सही पानी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी मिल जाए तो यह लंबे समय तक सुंदर फूल देता रहता है।
4. कैलेंडुला (Calendula)
कैलेंडुला के फूल आमतौर पर पीले और नारंगी रंग के होते हैं। देखने में यह गेंदे के फूल जैसा लगता है, इसलिए कई लोग इसे “सर्दियों का गेंदा” भी कहते हैं।
इसके चमकीले फूल सर्दियों के गार्डन में बहुत अच्छे लगते हैं। कैलेंडुला कम देखभाल में भी अच्छी फूलों की बहार देता है, इसलिए नए बागवानों के लिए यह अच्छा विकल्प है।
कैलेंडुला का तैयार पौधा नर्सरी से मिल सकता है और इसे बीज से भी उगाया जा सकता है। अगर आप बीज से पौधा तैयार कर रहे हैं तो अच्छी गुणवत्ता के बीज और सही समय का ध्यान रखें।
कैलेंडुला के औषधीय उपयोगों का जिक्र मिलता है, लेकिन घर में उगाए गए किसी पौधे का सेवन या उपचार में उपयोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए।
गमले में कैलेंडुला कैसे लगाएँ?
कैलेंडुला के लिए 6–8 इंच का गमला काफी रहता है। मिट्टी उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली रखें। बगीचे की मिट्टी में मोटी रेत और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर मिट्टी तैयार कर सकते हैं।
कैलेंडुला को कितनी धूप चाहिए?
कैलेंडुला को रोजाना लगभग 4–6 घंटे की सीधी धूप अच्छी रहती है। सर्दियों की सुबह से दोपहर तक मिलने वाली धूप इसके लिए अच्छी होती है। बहुत कम रोशनी मिलने पर पौधा कमजोर हो सकता है और फूल भी कम आ सकते हैं।
कैलेंडुला में पानी और खाद
जब मिट्टी की ऊपरी परत सूख जाए, तभी पानी दें। सर्दियों में मिट्टी सूखने में समय लग सकता है, इसलिए रोजाना निश्चित समय पर पानी देना जरूरी नहीं है।
कैलेंडुला को बहुत ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। महीने में एक बार थोड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद देना पर्याप्त रहता है।
लगातार फूलों के लिए क्या करें?
खिलकर सूख चुके फूलों को हटाते रहें। इससे पौधा बीज बनाने में कम ऊर्जा लगाता है और नई शाखाएं तथा कलियां बनाने में मदद मिलती है।
अगर आपको पीले और नारंगी रंग के फूल पसंद हैं और कम देखभाल वाला पौधा चाहिए, तो कैलेंडुला को अपने सर्दियों के गार्डन में जरूर लगाएं।
5. पैंसी (Pansy)

पैंसी अपने रंग-बिरंगे और बहुरंगी फूलों के लिए जाना जाता है। एक ही फूल में अलग-अलग रंगों का सुंदर मेल दिखाई दे सकता है, जिससे यह सर्दियों के गार्डन में बहुत आकर्षक लगता है।
यह छोटा पौधा बालकनी, खिड़की के पास, छोटे गार्डन और गमलों के लिए अच्छा विकल्प है। पैंसी के फूलों का इस्तेमाल कभी-कभी केक, कुकीज और पेय पदार्थों की सजावट में भी किया जाता है, लेकिन किसी फूल को खाने से पहले उसकी किस्म और रसायन-मुक्त तरीके से उगाए जाने की पूरी जानकारी जरूर रखें।
गमले में पैंसी कैसे लगाएँ?
पैंसी को 6–8 इंच के गमले में आसानी से उगाया जा सकता है। मिट्टी के लिए 50% बगीचे की मिट्टी, 30% वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद और 20% मोटी रेत का मिश्रण इस्तेमाल कर सकते हैं।
पैंसी को कितनी धूप चाहिए?
पैंसी को रोजाना लगभग 4–6 घंटे की सीधी धूप अच्छी रहती है। सर्दियों की सुबह की धूप इसके लिए बहुत अच्छी होती है। पर्याप्त रोशनी मिलने पर फूलों के रंग चमकीले रहते हैं और पौधा स्वस्थ रहता है।
पैंसी में पानी, खाद और देखभाल
ऊपर की 1–2 इंच मिट्टी सूखी लगे, तभी पानी दें। महीने में एक बार थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद या पत्तियों की खाद दी जा सकती है।
मुरझाए हुए फूलों को हटाते रहें और पत्तियों व नई कलियों को समय-समय पर देखें। किसी कीट या रोग के लक्षण शुरुआत में दिखाई दें तो प्रभावित हिस्से को हटा देना आसान रहता है।
पैंसी कम जगह में उगने वाला बेहद खूबसूरत सर्दियों का फूल है। अगर आपके पास बालकनी या छोटे गमले हैं, तो इसे जरूर आजमा सकते हैं।
6. डायन्थस (Dianthus)
डायन्थस आसानी से उगने वाला बहुत सुंदर सर्दियों का फूल है। इसके छोटे-छोटे, चकरी जैसे दिखने वाले फूल लाल, गुलाबी, बैंगनी और सफेद जैसे रंगों में मिलते हैं। कई किस्मों में दो रंगों का सुंदर मेल भी दिखाई देता है।
जब डायन्थस में एक साथ बहुत सारे फूल आते हैं, तो पूरा पौधा किसी छोटे गुलदस्ते जैसा लगता है। इसे छोटे गमलों, बालकनी और हैंगिंग बास्केट में भी लगाया जा सकता है।
डायन्थस को कितनी धूप चाहिए?
डायन्थस को रोजाना लगभग 4–5 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए। पर्याप्त धूप मिलने पर पौधा स्वस्थ रहता है और ज्यादा फूल आ सकते हैं।
डायन्थस में पानी और खाद
मिट्टी सूखी लगे तभी पानी दें और गमले में पानी जमा न रहने दें। लगातार गीली मिट्टी में इसकी जड़ें खराब हो सकती हैं।
महीने में एक बार थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद दी जा सकती है। सही धूप, संतुलित पानी और हल्की खाद मिलने पर डायन्थस सर्दियों से बसंत की शुरुआत तक फूल दे सकता है।
7. स्नैपड्रैगन (Snapdragon)
स्नैपड्रैगन, एंटीराइनम और डॉग फ्लावर एक ही फूल के अलग-अलग नाम हैं। इसके फूलों की बनावट देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी छोटे जानवर का मुंह हो, इसलिए इसे डॉग फ्लावर भी कहा जाता है।
इसके फूल लाल, गुलाबी, पीले, नारंगी, सफेद और कई दूसरे रंगों में मिलते हैं। यह सर्दियों के गार्डन में काफी आकर्षक दिखाई देता है।
स्नैपड्रैगन को बीज से उगाया जा सकता है। अगर आप जल्दी फूल देखना चाहते हैं, तो नर्सरी से तैयार पौधा लेना आसान रहता है।
स्नैपड्रैगन के लिए मिट्टी और गमला
स्नैपड्रैगन को बहुत बड़े गमले की जरूरत नहीं होती। मध्यम आकार का गमला, जिसमें पानी निकलने के लिए छेद हों, पर्याप्त रहता है। मिट्टी हल्की, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली रखें।
स्नैपड्रैगन को कितनी धूप चाहिए?
स्नैपड्रैगन को रोजाना कम से कम 4–5 घंटे की सीधी धूप चाहिए। सर्दियों की सुबह की धूप इसके लिए अच्छी रहती है। ज्यादा छाया में शाखाएं कमजोर हो सकती हैं और फूल कम आ सकते हैं।
स्नैपड्रैगन में पानी और देखभाल
ऊपर की मिट्टी सूखने पर पानी दें। महीने में एक बार थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट, सड़ी गोबर की खाद या पत्तियों की खाद दी जा सकती है।
सूखे फूलों को हटाते रहने से पौधा साफ दिखता है और नई कलियों के लिए जगह बनी रहती है। सही मिट्टी, धूप और पानी मिलने पर स्नैपड्रैगन लंबे समय तक सुंदर फूल दे सकता है।
8. एलिसम (Alyssum)
एलिसम छोटा, घना और फैलने वाला फूलदार पौधा है। इसके छोटे-छोटे फूल इतने घने गुच्छों में आते हैं कि फूल आने के समय हरी पत्तियां बहुत कम दिखाई देती हैं। इसके फूल सफेद, गुलाबी, बैंगनी, पीले और कुछ दूसरी किस्मों में अलग रंगों में मिल सकते हैं।
इसके फूलों से हल्की और मीठी खुशबू आती है, इसलिए इसे स्वीट एलिसम भी कहा जाता है। इसे बीज से उगाना आसान है और सितंबर से नवंबर के बीच बीज लगाए जा सकते हैं।
एलिसम के लिए गमला और मिट्टी
एलिसम की जड़ें ज्यादा गहरी नहीं जातीं, इसलिए इसे बहुत गहरे गमले की जरूरत नहीं होती। थोड़ा चौड़ा गमला या हैंगिंग बास्केट इसके लिए अच्छा रहता है।
मिट्टी हल्की, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली रखें। बगीचे की मिट्टी, रेत और कम्पोस्ट मिलाकर मिट्टी का मिश्रण तैयार किया जा सकता है।
एलिसम को कितनी धूप चाहिए?
एलिसम को कुछ घंटे की सीधी धूप या अच्छी रोशनी चाहिए। सर्दियों की हल्की धूप में यह अच्छी बढ़वार करता है। बहुत ज्यादा छाया में फूल कम हो सकते हैं।
एलिसम में पानी और खाद
मिट्टी को पूरी तरह सूखने न दें, लेकिन लगातार गीला भी न रखें। महीने में एक बार थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद पर्याप्त रहती है।
कम देखभाल में गमले या हैंगिंग बास्केट को फूलों से भर देने के लिए एलिसम बहुत अच्छा पौधा है।
9. वर्बेना (Verbena)
वर्बेना छोटे-छोटे फूलों के घने गुच्छे बनाने वाला बहुत सुंदर पौधा है। इसके लाल, गुलाबी, सफेद, बैंगनी और दो रंगों वाले फूल गार्डन को बहुत रंगीन बना देते हैं।
यह गमलों, बालकनी और हैंगिंग बास्केट में बहुत अच्छा दिखाई देता है। इसकी शाखाएं फैलकर बढ़ती हैं और फूल आने पर पूरा पौधा किसी रंगीन गुलदस्ते जैसा लगता है।
वर्बेना को बीज और कोमल तने की कटिंग, दोनों से उगाया जा सकता है। जल्दी फूलों के लिए नर्सरी से तैयार पौधा लेना आसान रहता है।
वर्बेना के लिए गमला और मिट्टी
वर्बेना को 6–8 इंच के गमले में लगाया जा सकता है। अगर आप चाहते हैं कि पौधा फैलकर अच्छा दिखे तो थोड़ा चौड़ा गमला चुनें।
इसके लिए 40% बगीचे की मिट्टी, 30% कम्पोस्ट और 30% रेत का मिट्टी मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है।
वर्बेना को कितनी धूप चाहिए?
वर्बेना को अच्छी फूलों की बहार के लिए रोजाना लगभग 6–8 घंटे की सीधी धूप चाहिए। ज्यादा छाया में इसकी बढ़वार कमजोर हो सकती है और फूल कम आ सकते हैं।
वर्बेना में पानी और खाद
ऊपर की मिट्टी सूखने पर पानी दें। मिट्टी में हल्की नमी रहे, लेकिन गमले में पानी जमा न हो।
महीने में एक बार वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद दी जा सकती है। मुरझाए फूलों को हटाते रहने से पौधा साफ दिखता है और नई कलियां बनने में मदद मिलती है।
10. गज़ानिया (Gazania)
गज़ानिया डेज़ी परिवार का एक बहुत सुंदर पौधा है। इसके बड़े और चमकीले फूल छोटे सूरजमुखी जैसे दिखाई देते हैं। इसके फूल पीले, नारंगी, लाल, गुलाबी, सफेद और दो रंगों वाली किस्मों में मिलते हैं।
गज़ानिया की खासियत यह है कि इसके फूल धूप में पूरी तरह खुलते हैं और शाम होने या रोशनी कम होने पर बंद होने लगते हैं। इसलिए यह धूप वाली जगह पर सबसे ज्यादा सुंदर दिखाई देता है।
गज़ानिया को बीज से उगाया जा सकता है और पुराने पौधे को अलग करके भी बढ़ाया जा सकता है। नर्सरी से तैयार पौधा लेना आसान विकल्प है।
गज़ानिया के लिए गमला और मिट्टी
गज़ानिया फैलकर बढ़ता है, इसलिए बहुत गहरे गमले की जगह चौड़ा और कम गहरा गमला अच्छा रहता है। मिट्टी में पानी आसानी से निकलना चाहिए।
अगर बगीचे की मिट्टी भारी या चिकनी है, तो उसमें रेत और कम्पोस्ट मिलाकर हल्का बनाएं।
गज़ानिया को कितनी धूप चाहिए?
गज़ानिया को दिन के ज्यादातर समय सीधी धूप मिलनी चाहिए। अच्छी धूप मिलने पर इसके फूल ज्यादा आते हैं और अच्छे से खुलते हैं। ज्यादा छाया में फूल कम हो सकते हैं।
गज़ानिया में पानी और खाद
ऊपर की मिट्टी सूखने पर अच्छी तरह पानी दें, लेकिन अगली बार पानी देने से पहले मिट्टी को हल्का सूखने दें।
महीने में एक बार वर्मी कम्पोस्ट, पत्तियों की खाद या सड़ी गोबर की खाद थोड़ी मात्रा में दी जा सकती है। मुरझाए फूल हटाते रहने से पौधा साफ दिखता है और नई कलियों के लिए जगह बनी रहती है।
11. जरबेरा (Gerbera)
जरबेरा सर्दियों में खिलने वाले सबसे आकर्षक फूलों में से एक है। इसके बड़े, चमकीले और साफ दिखाई देने वाले फूल लाल, पीले, गुलाबी, नारंगी, सफेद और कई दूसरे रंगों में मिलते हैं। यही वजह है कि इसका इस्तेमाल गुलदस्तों, सजावट और उपहारों में भी किया जाता है।
जरबेरा को बीज या पौधे को अलग करके बढ़ाया जा सकता है, लेकिन बीज से पौधा तैयार होने और फूल आने में समय लगता है। जल्दी फूलों के लिए नर्सरी से स्वस्थ और तैयार पौधा लेना आसान रहता है।
जरबेरा के लिए गमला और मिट्टी
जरबेरा को लगभग 6–8 इंच के गमले में लगाया जा सकता है। गमले में पानी निकासी के छेद जरूर होने चाहिए। एक जरूरी बात यह है कि पौधे का क्राउन, यानी जहां तना और जड़ें मिलती हैं, उसे मिट्टी में बहुत गहराई तक न दबाएं। बहुत गहराई में लगाने पर वहां नमी जमा हो सकती है और सड़न की समस्या बढ़ सकती है।
जरबेरा के लिए हल्की, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी रखें। बगीचे की मिट्टी में रेत और अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद मिलाकर मिट्टी तैयार की जा सकती है।
जरबेरा को कितनी धूप चाहिए?
जरबेरा को रोजाना लगभग 4–6 घंटे की सीधी धूप या अच्छी रोशनी मिलनी चाहिए। सर्दियों की सुबह की धूप इसके लिए अच्छी रहती है। बहुत कम रोशनी में पौधा कमजोर हो सकता है और फूल भी कम आ सकते हैं।
जरबेरा में पानी और खाद
जब ऊपर की करीब 1 इंच मिट्टी सूखी लगे, तभी पानी दें। पानी सीधे मिट्टी में धीरे-धीरे दें। पत्तियों और फूलों पर बार-बार पानी डालने से नमी बढ़ सकती है और फफूंद की समस्या हो सकती है।
महीने में एक बार थोड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट, पत्तियों की खाद या सड़ी गोबर की खाद दी जा सकती है। पीली, सूखी या रोगग्रस्त पत्तियों तथा मुरझाए फूलों को समय-समय पर हटाते रहें।
12. डहलिया (Dahlia)

डहलिया सर्दियों के सबसे खूबसूरत फूलों में से एक है। इसके फूल छोटे आकार से लेकर बहुत बड़ी किस्मों में 10–12 इंच तक भी हो सकते हैं। लाल, गुलाबी, बैंगनी, नारंगी, पीले, सफेद और कई दूसरे रंगों में मिलने वाला डहलिया गार्डन को बहुत आकर्षक बना देता है।
डहलिया की ऊंचाई और फूलों का आकार किस्म के अनुसार बदलता है। कुछ बौनी किस्में केवल 1–2 फीट तक बढ़ती हैं, जबकि कुछ लंबी किस्में 4–8 फीट तक जा सकती हैं। इसलिए नर्सरी से पौधा खरीदते समय उसकी किस्म, संभावित ऊंचाई और फूलों के आकार के बारे में जरूर पूछें।
डहलिया को कंद और कटिंग से तैयार किया जाता है। नए बागवानों के लिए नर्सरी से स्वस्थ पौधा लेना आसान रहता है।
डहलिया के लिए गमला और मिट्टी
सामान्य डहलिया के लिए 10–12 इंच का गमला अच्छा रहता है। बड़ी या ज्यादा फैलने वाली किस्म के लिए बड़ा और भारी गमला लें, ताकि पौधा हवा में गिरे नहीं।
मिट्टी उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली रखें। इसके लिए लगभग 40% बगीचे की मिट्टी, 30% अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद और 30% मोटी रेत मिलाई जा सकती है।
लंबी डहलिया को सहारा दें
लंबी या बड़े फूलों वाली डहलिया की किस्मों को सहारे की जरूरत पड़ सकती है। गमले में बांस की पतली खपच्ची या मजबूत डंडी लगाकर पौधे को हल्के हाथ से बांध दें। इससे फूलों के भार से शाखाएं झुकने या टूटने से बच सकती हैं।
डहलिया को कितनी धूप और पानी चाहिए?
डहलिया को अच्छी बढ़वार और ज्यादा फूलों के लिए रोजाना लगभग 6–8 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए। मिट्टी की ऊपरी परत सूखने पर पानी दें, लेकिन कंद के आसपास लगातार पानी जमा न होने दें।
डहलिया में खाद और पिंचिंग
बढ़वार के समय थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद दी जा सकती है। एक साथ बहुत तरह की खाद देने की जरूरत नहीं है।
जब पौधा लगभग 6–8 इंच ऊंचा हो जाए, तो उसकी ऊपर की बढ़ती नोक को हल्का पिंच कर सकते हैं। इससे नीचे से नई शाखाएं निकलती हैं और पौधा ज्यादा घना बन सकता है। मुरझाए फूल हटाते रहने से नई कलियों के लिए जगह बनी रहती है।
13. सिनेरेरिया (Cineraria)
सिनेरेरिया सर्दियों का बहुत खूबसूरत फूलदार पौधा है। इसके लाल, गुलाबी, नीले, बैंगनी, सफेद और कई रंगों वाले छोटे फूल घने गुच्छों में आते हैं। जब पौधा पूरी तरह फूलों से भर जाता है, तो यह रंगीन गुलदस्ते जैसा दिखाई देता है।
अगर आपके पास ऐसी जगह है जहां सर्दियों में तेज धूप नहीं आती, तो सिनेरेरिया अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे बीज से उगाया जा सकता है, लेकिन जल्दी फूलों के लिए नर्सरी से तैयार पौधा लेना आसान रहता है।
सिनेरेरिया के लिए गमला और मिट्टी
सिनेरेरिया के लिए लगभग 8–10 इंच का गमला अच्छा रहता है। मिट्टी हल्की, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली रखें। बगीचे की मिट्टी, मोटी रेत और सड़ी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर मिट्टी तैयार की जा सकती है।
सिनेरेरिया को कितनी धूप चाहिए?
सिनेरेरिया को बहुत तेज धूप की जरूरत नहीं होती। सर्दियों में 3–4 घंटे की हल्की सुबह की धूप या तेज अप्रत्यक्ष रोशनी इसके लिए अच्छी रहती है। दोपहर की तेज धूप से इसे बचाना बेहतर है।
सिनेरेरिया में पानी और खाद
सर्दियों में मिट्टी देर से सूखती है, इसलिए रोजाना पानी देने की जरूरत नहीं होती। जब ऊपर की मिट्टी सूखने लगे, तभी पानी दें।
लगभग 20–25 दिन के अंतर पर थोड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद दी जा सकती है। मुरझाए फूल हटाते रहें। सही रोशनी, संतुलित पानी और सामान्य देखभाल मिलने पर सिनेरेरिया अच्छी फूलों की बहार देता है।
14. साल्विया (Salvia)
साल्विया सर्दियों का बहुत आकर्षक फूलदार पौधा है। इसके फूल लाल, पीले, बैंगनी, गुलाबी और सफेद जैसे रंगों में मिलते हैं, लेकिन लाल साल्विया सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसके चमकीले फूल गमलों, गार्डन बेड और दूसरे पौधों के बीच बहुत सुंदर दिखाई देते हैं।
साल्विया ज्यादा जगह नहीं घेरता, लेकिन जब इसमें कई फूलों की मंजरी एक साथ निकलती है, तो पूरा पौधा बहुत आकर्षक लगता है। इसे बीज से उगाया जा सकता है। भारत के मैदानी इलाकों में सितंबर से नवंबर के बीच इसके बीज लगाए जा सकते हैं।
साल्विया के लिए गमला और मिट्टी
साल्विया को 6–8 इंच के गमले में लगाया जा सकता है। एक गमले में कई पौधे लगाने हों तो गमला बड़ा रखें और पौधों के बीच पर्याप्त दूरी दें।
मिट्टी उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। बगीचे की मिट्टी, जैविक खाद और रेत मिलाकर मिट्टी का मिश्रण तैयार किया जा सकता है।
साल्विया को कितनी धूप चाहिए?
साल्विया को अच्छी बढ़वार और भरपूर फूलों के लिए कई घंटे की सीधी धूप चाहिए। पर्याप्त धूप मिलने पर पौधा मजबूत रहता है और फूल भी अच्छे आते हैं।
साल्विया में पानी, खाद और पिंचिंग
ऊपर की मिट्टी सूखने पर पानी दें। महीने में एक बार थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद पर्याप्त रहती है।
पौधे को घना बनाने के लिए शुरुआत की बढ़वार में हल्की पिंचिंग की जा सकती है। ऊपर की बढ़ती नोक को हल्के से हटाने पर नीचे की तरफ नई शाखाएं निकल सकती हैं और आगे चलकर फूल भी ज्यादा आ सकते हैं।
15. अज़ेलिया (Azalea)

अज़ेलिया सर्दियों के गार्डन की खूबसूरती बढ़ाने वाला बहुत आकर्षक पौधा है। इसकी गहरे हरे रंग की पत्तियां और लाल, गुलाबी, बैंगनी, सफेद, नारंगी या दो रंगों वाले फूल इसे अलग पहचान देते हैं।
अज़ेलिया दूसरे सामान्य सर्दियों के पौधों की तुलना में थोड़ा संवेदनशील होता है। इसकी अच्छी बढ़वार और फूलों के लिए सही मिट्टी, रोशनी तथा पानी का संतुलन जरूरी है।
अज़ेलिया के लिए गमला और मिट्टी
अज़ेलिया की जड़ें बहुत गहराई में जाने की बजाय आसपास फैलती हैं। इसलिए बहुत गहरे गमले की जगह थोड़ा चौड़ा गमला बेहतर रहता है। बड़े पौधे के लिए 10–12 इंच का गमला ठीक रह सकता है, लेकिन गमला बदलते समय एकदम बहुत बड़ा गमला न लें।
अज़ेलिया को हल्की अम्लीय, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पसंद है। बगीचे की मिट्टी में पत्तियों की खाद, जैविक खाद और जरूरत के अनुसार रेत मिलाकर मिट्टी तैयार कर सकते हैं। अगर आपके इलाके की मिट्टी क्षारीय है, तो अज़ेलिया के लिए तैयार अम्लीय मिट्टी का मिश्रण लेना बेहतर रहता है।
राख, चूना या दूसरी क्षारीय चीजें इसकी मिट्टी में डालने से बचें।
अज़ेलिया को कितनी धूप चाहिए?
अज़ेलिया को तेज रोशनी और कुछ घंटे की हल्की सुबह की धूप अच्छी रहती है। इसे पूरे दिन की तेज सीधी धूप में नहीं रखना चाहिए। सर्दियों में हल्की सुबह की धूप और बाकी समय तेज रोशनी मिलने पर इसमें अच्छी फूलों की बहार आ सकती है।
अज़ेलिया में पानी और खाद
अज़ेलिया की मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन पानी जमा नहीं होना चाहिए। ऊपर की मिट्टी हल्की सूखी लगे तो पानी दें। मिट्टी को बहुत लंबे समय तक पूरी तरह सूखा छोड़ने पर पौधा मुरझा सकता है और कलियां गिर सकती हैं।
इसमें बहुत ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। पत्तियों की खाद या वर्मी कम्पोस्ट की छोटी मात्रा समय-समय पर दी जा सकती है। अधिक खाद से जड़ों को नुकसान हो सकता है।
बहुत अधिक ठंड में गमले की मिट्टी पर सूखी पत्तियों या राइस हस्क की पतली परत बिछाई जा सकती है, लेकिन इसे तने से चिपकाकर न रखें।
16. कैमेलिया (Camellia)
कैमेलिया के फूल देखने में काफी हद तक गुलाब जैसे लगते हैं, लेकिन इसमें कांटे नहीं होते। इसके लाल, गुलाबी और सफेद फूल, चमकदार हरी पत्तियां और घनी बढ़वार इसे बहुत सुंदर पौधा बनाते हैं। कई लोग इसे “बिना कांटों वाला गुलाब” या “सर्दियों का गुलाब” भी कहते हैं।
कैमेलिया में आमतौर पर सर्दियों से बसंत तक फूल देखने को मिल सकते हैं। यह थोड़ा संवेदनशील पौधा है, इसलिए इसे सही जगह, सही मिट्टी और संतुलित पानी की जरूरत होती है।
कैमेलिया के लिए गमला और मिट्टी
कैमेलिया धीरे-धीरे बड़ा होकर लगभग 4–6 फीट तक जा सकता है। छोटे पौधे को शुरुआत में 8–10 इंच के गमले में लगाया जा सकता है। जड़ें गमले को भरने लगें, तो इसे 12–14 इंच के बड़े गमले में लगाएं।
कैमेलिया को हल्की अम्लीय, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पसंद है। बगीचे की मिट्टी में पत्तियों की खाद, अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद और जरूरत के अनुसार रेत मिलाकर मिट्टी तैयार कर सकते हैं।
कैमेलिया को कितनी धूप चाहिए?
कैमेलिया को पूरे दिन की तेज सीधी धूप पसंद नहीं होती। इसे ऐसी जगह रखें जहां सुबह की हल्की धूप या छनकर आने वाली धूप मिले और बाकी समय अच्छी रोशनी बनी रहे।
गर्म इलाकों में दोपहर की तेज धूप से इसे बचाना जरूरी है, क्योंकि बहुत तेज धूप में इसकी पत्तियां खराब हो सकती हैं।
कैमेलिया में पानी और खाद
कैमेलिया की मिट्टी में हल्की नमी रखें, लेकिन उसे लगातार गीला न रहने दें। ऊपर की 1–2 इंच मिट्टी सूखने पर पानी दें। मिट्टी बहुत लंबे समय तक सूखी रहने से कलियां गिर सकती हैं, जबकि जरूरत से ज्यादा पानी से जड़ें सड़ सकती हैं।
महीने में एक बार पत्तियों की खाद या अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद थोड़ी मात्रा में दी जा सकती है। इस्तेमाल की हुई चाय की पत्तियां डालनी हों तो उन्हें पहले साफ करके सुखा लें और बहुत कम मात्रा में मिट्टी में मिलाएं।
कैमेलिया की छंटाई
खिलकर सूख चुके फूल हटाए जा सकते हैं। कैमेलिया में ज्यादा छंटाई की जरूरत नहीं होती। अगर कुछ शाखाएं बहुत ज्यादा फैल रही हों, तो फूल आने के बाद हल्की छंटाई कर सकते हैं।
एक रोचक बात यह है कि हमारी रोज की चाय वाला पौधा भी इसी वंश से जुड़ा है। चाय के पौधे का वैज्ञानिक नाम Camellia sinensis है।
17. प्रिमुला (Primula)
प्रिमुला, जिसे प्रिमरोज भी कहा जाता है, सर्दियों का बहुत सुंदर और लोकप्रिय फूलदार पौधा है। इसकी झुर्रीदार पत्तियों के बीच से निकलने वाले लाल, गुलाबी, बैंगनी, पीले और सफेद फूल पूरे पौधे को छोटे गुलदस्ते जैसा बना देते हैं।
गमले में प्रिमुला कैसे लगाएँ?
प्रिमुला के लिए लगभग 10–12 इंच चौड़ा गमला अच्छा रहता है। गमला बहुत छोटा न हो, ताकि पौधे को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिले।
मिट्टी हल्की, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली रखें। गमले में पानी निकलने के लिए छेद जरूर हों।
प्रिमुला को कितनी धूप चाहिए?
प्रिमुला को तेज और लंबे समय तक पड़ने वाली सीधी धूप पसंद नहीं होती। इसे हल्की सुबह की धूप या छनकर आने वाली रोशनी वाली जगह पर रखें। दोपहर की तेज धूप में इसकी पत्तियां मुरझा सकती हैं और फूल जल्दी खराब हो सकते हैं।
प्रिमुला में पानी और खाद
मिट्टी में हल्की नमी रखें, लेकिन लगातार गीली मिट्टी से बचें। ऊपर की मिट्टी हल्की सूखी लगे तो पानी दें।
महीने में एक बार थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट दी जा सकती है। बोन मील का इस्तेमाल करना हो तो बहुत कम मात्रा में दें और पैकेट पर दिए निर्देशों का ध्यान रखें।
18. अफ्रीकन डेजी (African Daisy / Osteospermum)

अफ्रीकन डेजी, जिसे ऑस्टियोस्पर्मम भी कहा जाता है, डेजी जैसे फूलों वाला बहुत सुंदर पौधा है। इसके फूल सफेद, बैंगनी, पीले, गुलाबी और कई दूसरे रंगों में मिलते हैं।
फूल आने पर पूरा पौधा रंग-बिरंगे फूलों से ढक जाता है। इसे बीज से उगाया जा सकता है, लेकिन जल्दी फूलों के लिए नर्सरी से तैयार पौधा लेना आसान रहता है।
अफ्रीकन डेजी के लिए गमला और धूप
अफ्रीकन डेजी को 10–12 इंच के गमले में लगाया जा सकता है। छोटे पौधे को पहले 6–8 इंच के गमले में लगाकर बाद में बड़े गमले में बदला जा सकता है।
अच्छी फूलों की बहार के लिए इसे भरपूर सीधी धूप चाहिए। हल्की छाया में यह जीवित रह सकती है, लेकिन फूल कम आ सकते हैं।
मिट्टी, पानी और खाद
मिट्टी उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। ऊपर की मिट्टी सूखने पर पानी दें। पौधा अच्छी तरह जम जाने के बाद कुछ हद तक सूखापन भी सहन कर सकता है, लेकिन अच्छे फूलों के लिए मिट्टी में हल्की नमी रखें।
महीने में एक बार थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट, पत्तियों की खाद या सड़ी गोबर की खाद दी जा सकती है।
19. एस्टर (Aster)
एस्टर के फूल डेजी और गुलदाउदी जैसे दिखाई देते हैं। इसे माइकलमस डेजी या चाइनीज एस्टर के नाम से भी जाना जाता है। इसके रंग-बिरंगे फूल सर्दियों के गार्डन को बहुत सुंदर बनाते हैं।
एस्टर को बीज से उगाने के लिए सितंबर से नवंबर का समय अच्छा रहता है। बीज से तैयार पौधे में कलियां बनने में लगभग 60–90 दिन लग सकते हैं। जल्दी फूलों के लिए नर्सरी से तैयार पौधा लिया जा सकता है।
एस्टर के लिए गमला, धूप और पानी
एक पौधे के लिए 8–10 इंच का गमला पर्याप्त रहता है। एक ही गमले में 2–3 पौधे लगाने हों, तो 12–14 इंच का गमला लें।
एस्टर को रोजाना लगभग 5–6 घंटे की सीधी धूप मिलने पर अच्छी बढ़वार और फूल आते हैं। मिट्टी में हल्की नमी रखें, लेकिन ऊपर की मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।
एस्टर में खाद और देखभाल
हर 15–20 दिन में बहुत थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद दी जा सकती है। सूखी शाखाओं और मुरझाए फूलों को समय-समय पर हटाते रहें।
20. कलांचो (Kalanchoe)
कलांचो एक रसीला फूलदार पौधा है, जो कम देखभाल में भी सुंदर फूल देता है। इसके लाल, गुलाबी, पीले, नारंगी और सफेद फूल बहुत आकर्षक दिखाई देते हैं। कुछ किस्मों में दो रंगों वाले फूल भी मिलते हैं।
कलांचो को कटिंग से तैयार करना आसान होता है, इसलिए यह नए बागवानों के लिए अच्छा विकल्प है।
कलांचो के लिए गमला और मिट्टी
कलांचो को 6–8 इंच के गमले में लगाया जा सकता है। यह रसीला पौधा है, इसलिए इसके लिए मिट्टी बहुत अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए।
अगर बगीचे की मिट्टी बहुत भारी न हो, तो 40% बगीचे की मिट्टी, 40% मोटी रेत और 20% जैविक खाद का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है। गमले में पानी निकलने के लिए छेद जरूर हों।
कलांचो में पानी देते समय रखें खास ध्यान
कलांचो की मोटी पत्तियों और तनों में पानी जमा रहता है, इसलिए इसे बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं होती। मिट्टी की ऊपर वाली परत सूखने पर ही पानी दें।
लगातार गीली मिट्टी या गमले में पानी जमा रहने से जड़ें सड़ सकती हैं। कलांचो में ज्यादा पानी देना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।
खराब हिस्सों को हटाएँ
अगर कोई पत्ती या तने का हिस्सा सड़ने लगे, काला पड़ जाए या संक्रमित दिखाई दे, तो उसे साफ औजार से काटकर अलग कर दें। इससे समस्या को बाकी स्वस्थ हिस्सों तक फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है।
धूप के हिसाब से फूल चुनें
अगर आपके गार्डन या बालकनी में दिनभर अच्छी धूप आती है, तो गुलाब, गुलदाउदी, पेटूनिया, वर्बेना, गज़ानिया, डहलिया, साल्विया, अफ्रीकन डेजी और एस्टर अच्छे विकल्प हैं।
अगर आपके पास केवल सुबह की हल्की धूप, छनकर आने वाली रोशनी या तेज अप्रत्यक्ष रोशनी है, तो अज़ेलिया, कैमेलिया, प्रिमुला और सिनेरेरिया बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
निष्कर्ष
सर्दियों का मौसम गार्डन को रंग-बिरंगे फूलों से भरने का सबसे अच्छा समय होता है। अगर आप नए बागवान हैं, तो कैलेंडुला, पेटूनिया, डायन्थस, एलिसम, वर्बेना, गज़ानिया या कलांचो जैसे सर्दियों में लगाए जाने वाले फूलों से शुरुआत कर सकते हैं।
अगर आप गार्डन में बड़े और आकर्षक फूल चाहते हैं, तो गुलाब, गुलदाउदी, डहलिया, जरबेरा और अज़ेलिया अच्छे विकल्प हो सकते हैं। वहीं कम जगह, बालकनी या हैंगिंग बास्केट के लिए पैंसी, डायन्थस, एलिसम, वर्बेना और पेटूनिया बहुत अच्छे रहते हैं।
हर पौधे की धूप और पानी की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए पौधा खरीदने के बाद उसे सही जगह रखें, मिट्टी में पानी जमा न होने दें और जरूरत के अनुसार ही खाद-पानी दें। थोड़ी-सी सही देखभाल के साथ आपका सर्दियों का गार्डन फूलों से भर सकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सर्दियों में फूलों के पौधे लगाने का सही समय कब है?
भारत के ज्यादातर मैदानी इलाकों में सितंबर से नवंबर के बीच सर्दियों के फूलों के बीज या नर्सरी के पौधे लगाना अच्छा रहता है। बहुत ज्यादा ठंड शुरू होने से पहले पौधों को जड़ें फैलाने और जमने का समय मिल जाता है।
क्या सर्दियों के फूलों को रोजाना पानी देना चाहिए?
नहीं। सर्दियों में मिट्टी धीरे-धीरे सूखती है। इसलिए रोजाना निश्चित समय पर पानी देने की जरूरत नहीं होती। ऊपर की मिट्टी सूखी लगे, तभी पानी दें। लगातार गीली मिट्टी में जड़ें खराब हो सकती हैं।
नए बागवानों के लिए सबसे आसान सर्दियों के फूल कौन-से हैं?
कैलेंडुला, पेटूनिया, डायन्थस, एलिसम, वर्बेना, गज़ानिया और कलांचो नए बागवानों के लिए अच्छे विकल्प हैं। इन्हें सही धूप, अच्छी जल निकासी और जरूरत के अनुसार पानी मिल जाए तो ये अच्छे फूल दे सकते हैं।
बालकनी में कौन-से सर्दियों के फूल लगाए जा सकते हैं?
छोटी बालकनी के लिए पैंसी, डायन्थस, एलिसम, पेटूनिया, वर्बेना, कैलेंडुला, कलांचो और जरबेरा अच्छे विकल्प हैं। अपने स्थान पर मिलने वाली धूप के हिसाब से पौधा चुनें।
ज्यादा फूलों के लिए क्या करना चाहिए?
पौधे को उसकी जरूरत के अनुसार धूप दें, गमले में पानी जमा न होने दें, जरूरत के अनुसार ही खाद दें और मुरझाए फूल और सूखी शाखाओं को हटाते रहें। ज्यादा खाद या ज्यादा पानी देने से फूल बढ़ने के बजाय पौधे को नुकसान हो सकता है।
क्या सभी सर्दियों के फूलों को भरपूर धूप चाहिए?
नहीं। गुलाब, पेटूनिया, गज़ानिया, डहलिया और साल्विया जैसे पौधों को अच्छी सीधी धूप चाहिए। वहीं अज़ेलिया, कैमेलिया, प्रिमुला और सिनेरेरिया को हल्की सुबह की धूप या तेज अप्रत्यक्ष रोशनी ज्यादा उपयुक्त रहती है।

